दिल्ली दंगा पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाता विज़न 2026

दिल्ली दंगों की त्रासदी सैकड़ों परिवारों को बुरी तरीके से उजाड़ दिया था। पीड़ित परिवारों के घर और कारोबार पूरी तरीके से खाक में मिल चुके हैं। सिर्फ घर और कारोबार का खत्म होना ही यहां पर काबिले जिक्र नहीं है लोगों की हजारों उम्मीदें भी टूट चुकी हैं जो उन्होंने अपने भविष्य के बारे में सोची थी।

सरकारों द्वारा केवल आश्वासन के लॉलीपॉप के अलावा पीड़ितों को कुछ नहीं दिया गया। बहुत सारे गैर सरकारी संस्थाएं इन पीड़ित परिवारों के दुख दर्द को कम करने के लिए पुनर्वास और राहत का काम अंजाम दे रहे हैं। इन्हीं संस्थाओं में से एक है विजन 2026।

विज़न 2026 ने दंगा पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए हर संभव प्रयत्न किया है इसमें चाहे उनके घरों का पुनर्निर्माण हो या उनके कारोबार को दोबारा से शुरू करवाना हो। विजन ने हर काम बखूबी अंजाम दिया है। आइए आपको मिलवा आते हैं कुछ ऐसे ही परिवारों से जिनके पुनर्वास का मुकम्मल काम विजन टीम द्वारा किया गया है और इन पीड़ित परिवारों को एक उम्मीद की नई किरण दी गई।

दिल्ली में हुए दंगों ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी और कारोबार तबाह करके रख दिया है. उत्तर पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास इलाके में दंगाइयों ने एक पूरे मोहल्ले को आग लगा दी थी. इसी मोहल्ले में नाले के पास एक पुराना सा घर था जहां पर एक महिला रजिया बेगम अपने 5 बच्चों के साथ रहती थी.

रजिया बेगम के पति का 2012 में देहांत हो चुका है. उसके बाद रजिया बेगम के भाइयों ने उस की कमाई के लिए एक छोटा सा घर और उस घर के ऊपर कुछ कमरे किराए के लिए बनवा दिये ताकि वह अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें और किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े.

फरवरी में जब दिल्ली में दंगों की आग भड़की तो ज़ालिम दंगाइयों ने रजिया बेगम के पूरे घर को आग लगा दी जिससे पूरा घर तबाह हो गया. घर का एक हिस्सा आग की वजह से कमजोर हो गया और कुछ अर्से बाद गिर गया.

अपने जले हुये घर को देख कर रजिया बेगम हिम्मत व् हौंसला छोड़ चुकी थी. अब वह अपने बच्चों को कहां पर रखेगी और इनका पालन पोषण कैसे करें यही सोच कर रजिया बेगम का दिल बैठा जा रहा था.

ऐसी मुसीबत की घड़ी में विजन 2026 एक बार फिर एक मुसीबत में शामिल परिवार की मदद के लिए आगे आया. विजन 2026 ने ना केवल रजिया बेगम का नीचे का घर बना कर दिया बल्कि ऊपर के किराए के मकान भी बना कर दिया ताकि रजिया बेगम के रोजगार का एक जरिया दोबारा हो सके और उससे वह अपने परिवार का ठीक तरीके से पालन पोषण कर सके.

दंगों से पीड़ित परिवारों के लिए विजन 2026 पहले दिन से काम कर रहा है जिसमें पीड़ित परिवारों के टूटे हुए घरों को बनाना हो या उनके बर्बाद हो चुके कारोबार को दोबारा शुरू करवाना हो विजन 2026 में हर काम बखूबी अंजाम दिया है.

फरवरी का महीना था देश की राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके में दंगों की आग भड़क चुकी थी सैकड़ों परिवारों के घरों को आग के हवाले कर दिया गया था भयानक माहौल था लोगों को मारा जा रहा था दुकाने लूटी जा रही थी और घरों को आग लगाई जा रही थी।

उत्तर पूर्वी दिल्ली में एक इलाका है मुस्तफाबाद। इसी इलाके में एक नौजवान रहता है जिसका नाम खुर्शीद सैफी है जब दंगों की आग में यह पूरा इलाका जल रहा था तो खुर्शीद सैफी ने देखा की फारुकिया मस्जिद के पास दंगाइयों ने कुछ औरतों को घेर रखा है खुर्शीद ने अपनी जान की परवाह किए बिना उस तरफ बढ़ गया दंगाइयों ने उन औरतों को छोड़कर खुर्शीद को पकड़ लिया और उसे बुरी तरीके से मारने लगे मारपीट का आलम इतना बुरा था कि दंगाइयों ने खुर्शीद का पूरा सर फोड़ दिया था और उसका पूरा जबड़ा तोड़ दिया था।

आदमी के रूप में हैवानियत की हदों को पार करते हुए दंगाइयों ने खुर्शीद की भाइयों को बंदूक की नोक से मार-मार कर फोड़ दिया खुर्शीद जब अधमरा हो गया तो दंगाइयों ने उसे मरा हुआ समझ कर वहीं छोड़ दिया और चले गए।

इंसानियत को जिंदा रखने वाले कुछ लोगों ने खुर्शीद को हॉस्पिटल पहुंचाया मगर डॉक्टरों ने खुर्शीद की हालत को देखते हुए इसके बचने की उम्मीद ना के बराबर बताई.

खुदा की रहमत से खुर्शीद की जान बची मगर उसके बाद यह हालत है कि खुर्शीद की एक आंख चली गई और जबड़ा भी पूरी तरीके से टूट चुका है जिसकी वजह से खुर्शीद खाना ठीक से नहीं खा सकता है।

खुर्शीद के परिवार में बीवी और तीन बच्चे हैं इसके अलावा पिताजी भी साथ में रहते हैं जिनकी 5 बार हार्ट की सर्जरी हो चुकी है। दंगों की आग बुझ चुकी थी मगर खुर्शीद की पूरी जिंदगी तबाह हो चुकी थी घर की आमदनी का कोई जरिया नहीं था और खुर्शीद की भी हालत ऐसी थी जो पहले की तरह इंटीरियर डिजाइनिंग का काम नहीं कर सकता था खुर्शीद उम्मीद हार चुका था जब दोबारा वह अपने पैरों पर कैसे खड़ा होगा अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करेगा।

ऐसी मुश्किल घड़ी में विजन 2026 के लोग खुर्शीद से मिले उसको हिम्मत और हौसला दिया और उसके कारोबार को दोबारा शुरू करवाने का आश्वासन दिया। ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन की मदद से खुर्शीद ने मुस्तफाबाद मार्केट में किराना की दुकान शुरू कर दी है बातचीत में खुर्शीद ने बताया कि इस दुकान से उसके परिवार का गुजर बसर अच्छे तरीके से हो जाएगा विजन 2026 के लोग उसके लिए फ़रिश्ते बन कर आए हैं जिन्होंने उसकी उम्मीदों को टूटने से बचा लिया और उसके कारोबार को शुरू करवाया जिससे वह अपने परिवार का पालन पोषण अच्छे तरीके से कर सकेगा।

(यह पूरी स्टोरी खुर्शीद सैफी से बातचीत के आधार पर लिखी गई)

रोजगार की तलाश में 2001 में बिहार से सलमान नाम का एक व्यक्ति दिल्ली आया. यहां पर आकर उसने अपनी मेहनत से शास्त्री नगर में एक रेस्टोरेंट शुरू किया। वह रेस्टोरेंट बहुत अच्छे से चलने लगा था. सलमान अपने परिवार के साथ चांद बाग में रहता था.

दिल्ली दंगों से कुछ दिन पहले उसके रेस्टोरेंट के मालिक ने रेस्टोरेंट की दुकान खाली करने को कहा ताकि उस दुकान का रिनोवेशन का काम हो सके. सलमान ने दुकान खाली करी और अपना रेस्टोरेंट का सारा सामान एक गाड़ी में लोड करके अपने घर की तरफ जाने लगा. भजनपुरा के आसपास दंगाइयों ने उसे रोका और उसके सारे सामान को लूट लिया।

अगले दिन जब वह फजर की नमाज के बाद घर लौट रहा था तो दंगाइयों ने उसके पैर में गोली मार दी और वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया. उसका इलाज चला और वह अभी ठीक हो गया है मगर इन दिल्ली दंगों ने उसके कारोबार और उसकी जिंदगी को उथल-पुथल दिया।

सलमान की हालत फिर से 2001 वाली हो गयी थी. अब उसकी कमाई का कोई साधन नहीं था. विजन 2026 की टीम ने ऐसे मौके पर सलमान का हाथ थामा और उसे दोबारा से रेस्टोरेंट्स शुरू करने के लिए आश्वासन दिया।

नये और बुलंद हिम्मत व हौसले के साथ सलमान ने जाफराबाद में विजन 2026 की मदद से दोबारा से रेस्टोरेंट शुरू कर दिया है. विज़न 2026 ने दंगों की मार में उजड़ चुके एक परिवार को फिर से अपने पैरों पर खड़े होने में मदद की है.

एक साहब हैं जिनका नाम मंजूर है इनकी सिलाई की दुकान थी नूर ए इलाही इलाके में. 35 सालों से वह इस दुकान को बहुत ही बेहतरीन अंदाज से चला रहे थे. फरवरी के महीने में जब दिल्ली में दंगे हुए तो दंगाइयों ने इनकी दुकान का ताला तोड़कर दुकान का सारा सामान सड़क पर ले जाकर आग के हवाले कर दिया और दुकान के बाकी बचे सामान को लूट कर ले गए.

दंगा तो कुछ अरसे बाद खत्म हो गया मगर यह बेचारे अपने कारोबार से हाथ धो बैठे। इसी बीच विजन 2026 को इनकी इस परेशानी का पता चला विजन की टीम द्वारा इनकी उस दुकान को दोबारा शुरू करवाने का आश्वासन दिया गया. इनकी दुकान को दोबारा चलाने के लिए विजन 2026 की टीम ने काम शुरू कर दिया है बहुत जल्द ही इनकी दुकान की पेंट-पुताई हो कर नयी सिलाई मशीनें इनको मुहैय्या करवा कर इनकी दुकान को दुबारा शुरू करवा दिया जायेगा.

इस प्रकार लोगों की खिदमत में अग्रणी संस्था विजन 2026 ने एक बार फिर एक परेशान हाल इंसान की मदद कर उसके रोजगार को दुबारा खड़ा करने में अपनी अहम भूमिका निभाई।

आज से 5 महीने पहले उत्तर पूर्वी दिल्ली में भयानक दंगे हुए थे जिसमें सैकड़ों परिवार उजड़ गए थे उनके घर बार कारोबार सब तबाह हो गए थे उन परिवारों की इस मुश्किल समय में मदद करनी हमारी जिम्मेदारी बनती है.

खजुरी खास इलाके में दो भाई रहते है शाहिद और मुजाहिद. दोनों ने मेहनत-मजदूरी कर एक छोटा सा घर बनाया था. घर का पुनर्निर्माण के लिए दोनों ने लगभग डेढ़ लाख रुपए पैसे जोड़ कर रखे थे.

फिर एक नफरत की आग उत्तर पूर्वी दिल्ली को अपनी चपेट ले लेती है. हजारों दंगाई खुलेआम आगजनी और लूटपाट करते हैं. इस नफरत की आग में दंगाई शाहिद के घर को भी आग लगा देते है और पैसे और घर का सामान लूट कर ले जाते हैं.

शाहिद इस हादसे से पूरी तरह टूट चुका था. उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब उसका परिवार अपनी आगे की जिंदगी कैसे बसर करेगा क्यूंकि सब कुछ तो तबाह हो चुका था.

शाहिद के परेशान हाल परिवार के लिए विज़न 2026 एक उम्मीद की किरण बन के आया. विज़न 2026 ने अपने ‘दिल्ली राहत और पुनर्वास’ प्रोजेक्ट के तहत शाहिद का पूरा घर बनवा कर दिया. 29 जुलाई को विज़न 2026 के पदाधिकारीयों ने शाहिद को उसका पुनर्निर्मित घर सुपुर्द कर दिया.

इसी के साथ विज़न 2026 की तरफ से एक बैटरी रिक्शा भी शाहिद को दिया गया ताकि वह अपने परिवार का पालन-पोषण ठीक तरीके से कर सके.

दंगों से पीड़ित परिवारों के लिए विजन 2026 पहले दिन से काम कर रहा है जिसमें पीड़ित परिवारों के टूटे हुए घरों को बनाना हो या उनके बर्बाद हो चुके कारोबार को दोबारा शुरू करवाना हो विजन 2026 में हर काम बखूबी अंजाम दिया है.

इमरान खान अपने परिवार के साथ शिव विहार, दिल्ली एरिया में एक किराये के मकान में रहता था. वह जफराबाद में एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करता था और उसी कमाई से उसके घर का खर्चा चलता था. दिल्ली दंगों में इमरान के घर को भी लूट लिया गया था. बदकिस्मती से इन दंगों के बाद इमरान की जॉब भी चली गयी और कमाई का कोई जरिया नहीं रह गया था.

विज़न 2026 ने इमरान खान की इस परेशानी को समझा और उसके रोजगार के लिए एक दुकान खुलवा कर दी जिसमें इमरान ने बिरयानी बेचना शुरू किया है. विज़न 2026 की मदद से इमरान खान दुबारा से अपने परिवार का पालन पोषण इस दुकान की कमाई से कर रहा है.

उत्तर पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार के पास इलाका है जिसका नाम है नूर ए इलाही। बेहद घनी आबादी वाले इस इलाके में हजारों लोग छोटा बड़ा कारोबार करते है. दंगों की आग इस इलाके में तो नहीं पहुंची मगर पास के ही हाईवे पर बहुत नुकसान हुआ.

एक साहब है जिनका नाम अल्ताफ. इनका अच्छा खासा कारोबार था और परिवार हसीं-ख़ुशी जिंदगी बसर कर रहा था. अचानक से फरवरी महीने में दंगों की आग भड़क गयी. अल्ताफ किसी काम से मेन रोड से घर की तरफ जा रहे थे अचानक से दंगाईयों द्वारा उन्हें गोली मार दी गयी और वह गंभीर रूप से जख़्मी हो गया था.

मैंने अल्ताफ से जब बातचीत की थी तो उसने मुझे बताया था कि “भाई मैं कोई गरीब या मिस्कीन नहीं हूँ. मेरा अच्छा कारोबार था मगर इन दंगों ने उस कारोबार को तबाह व बर्बाद कर दिया है. मेरा इलाज प्राइवेट हॉस्पिटल में चला है जिस वजह से मैं आर्थिक तौर पर बुरी तरह टूट चुका हूँ.”

विज़न 2026 एक बार फिर आगे आया और अल्ताफ की इस परेशानी में उसे हिम्मत व् हौंसला दिया और उसे कारोबार दुबारा शुरू करवाने का आश्वासन दिया. अल्ताफ की हिम्मत और विज़न 2026 की मदद से अल्ताफ ने बेल्ट और पर्स की फैंसी आइटम की दुकान शुरू हो चुकी है.

दंगों से पीड़ित परिवारों के लिए विजन 2026 पहले दिन से काम कर रहा है जिसमें पीड़ित परिवारों के टूटे हुए घरों को बनाना हो या उनके बर्बाद हो चुके कारोबार को दोबारा शुरू करवाना हो विजन 2026 में हर काम बखूबी अंजाम दिया है.

24 फरवरी 2020 एक लड़की जिसका नाम नरगिस नसीम है वह अपने बाहरवीं के पेपर देने के लिए घर से निकली है. अचानक से हवा बदलती है और दिल्ली में दंगे शुरू हो जाते हैं. सैंकड़ों लोगों के घरों को या तो आग लगा दी जाती है या लूट लिया जाता है.

नरगिस एग्जाम से वापस लौटती है तो देखती है दंगाईयों द्वारा उसके घर को आग लगा दी गयी है और सब कुछ खाक हो चुका है. इसी के साथ खाक हो गए उसके सपने जो उसने देखे थे. उसकी सारी किताबें उस आग की लपटों में ही स्वाह हो चुकी है.

दंगों की आग ने नरगिस और उसके परिवार को खजूरी खास का अपना घर छोड़ कर पास के ही इलाके चंदू नगर में किराये में रहने को मजबूर कर दिया. सामाजिक खिदमत में अग्रणी जमात ए इस्लामी हिन्द की दिल्ली इकाई के लोग नरगिस और उसके परिवार से मिले और उन्हें उनका घर दुबारा बनवाने का आश्वासन दिया. 4 महीने के बाद उनका घर बन कर तैयार हो गया और नरगिस का परिवार अपने पुराने घर आ कर रहने लगा.

नरगिस ने इस हादसे से अपने हौंसलें को टूटने नहीं दिया और मेहनत व् लगन के साथ अपनी पढ़ाई में मगन रही और इसका नतीजा देखने को मिला जब जुलाई में सीबीएसई के बारहवीं का रिजल्ट आया और नरगिस 62 % नम्बरों के साथ पास हो गयी.

नरगिस के इस हौंसलें को सलाम करते हुये विज़न 2026 ने उसकी उच्च शिक्षा का पूरा खर्चा उठाने का फैसला किया है. विज़न 2026 दंगों में पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए पहले दिन से काम कर रहा है. जिनमें पीड़ित परिवारों के घरों का पुनर्निर्माण, तबाह हो चुके कारोबार को दुबारा शुरू करवाना, दंगों में अनाथ हो चुके बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्चा आदि प्रमुख काम है.